
वैश्विक नागरिक अपील
मानव गरिमा, मूलभूत अधिकार एवं “खुशहाल समाज अभियान” के संबंध में
माननीय राष्ट्रपति महोदया/महोदय अथवा माननीय प्रधानमंत्री जी,
भारत सरकार
नई दिल्ली, भारत
विषय: मानव-केंद्रित विकास, नागरिकों के मूलभूत अधिकार तथा “खुशहाल समाज अभियान” के संबंध में एक वैश्विक नागरिक अपील।
महोदय/महोदया,
सादर प्रणाम।
मेरा नाम मित्र लाल पार्दे है। मैं एक साधारण नेपाली नागरिक हूँ और पिछले 20 वर्षों से पोलैंड में निवास कर रहा हूँ। मैं “साथी दर्शन (Sathi Philosophy)” तथा “खुशहाल समाज अभियान (Happy Society Campaign)” का परिकल्पनाकार होने के नाते यह विनम्र पत्र आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ।
मैं किसी सरकार, राजनीतिक दल, धर्म या संस्था का प्रतिनिधि नहीं हूँ। मैं केवल मानवता, सामाजिक न्याय और प्रत्येक व्यक्ति के सम्मानजनक जीवन में विश्वास रखने वाला एक सामान्य नागरिक हूँ।
मैं भारत के संविधान, लोकतांत्रिक परंपराओं, संप्रभुता तथा उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति अपना गहरा सम्मान व्यक्त करता हूँ। मेरा यह पत्र किसी भी प्रकार से भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का प्रयास नहीं है, बल्कि मानव-केंद्रित विकास पर वैश्विक संवाद को प्रोत्साहित करने का एक विनम्र प्रयास है।
मेरा विश्वास है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास, आधुनिक अवसंरचना या तकनीकी उपलब्धियों से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से भी मापी जाती है कि उसके नागरिक कितने सम्मान, सुरक्षा, समान अवसर और आशा के साथ जीवन जीते हैं।
इसी भावना के साथ मैं “खुशहाल समाज अभियान” के पाँच सार्वभौमिक मानवीय लक्ष्य आपके समक्ष सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करता हूँ।
प्रत्येक नागरिक के लिए भोजन, आवास और वस्त्र की उपलब्धता
हर नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए आवश्यक भोजन, सुरक्षित आवास और बुनियादी जीवन आवश्यकताओं तक पहुँच सुनिश्चित करने के प्रयास निरंतर मजबूत किए जाएँ।
शिक्षा और स्वास्थ्य आर्थिक बोझ न बनें
कोई भी माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा के लिए जीवनभर ऋण लेने को मजबूर न हों।
कोई भी नागरिक उपचार के लिए कर्ज़ लेने को विवश न हो।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ प्रत्येक नागरिक की पहुँच में हों।
प्रत्येक परिवार के लिए सम्मानजनक आजीविका का अवसर
ऐसी नीतियों को प्रोत्साहित किया जाए जिनसे प्रत्येक परिवार को कम से कम एक सम्मानजनक रोजगार या स्थायी आजीविका का अवसर प्राप्त हो सके।
प्रत्येक गाँव के लिए सिंचाई और कृषि अवसंरचना
खाद्य सुरक्षा, कृषि विकास तथा ग्रामीण समृद्धि के लिए सिंचाई, जल प्रबंधन और कृषि अवसंरचना को निरंतर सुदृढ़ किया जाए।
प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल
हर परिवार को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयासों को राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं में निरंतर स्थान दिया जाए।
“खुशहाल समाज अभियान” का सपना
इस अभियान का उद्देश्य किसी सरकार की आलोचना करना या किसी देश की नीतियों में हस्तक्षेप करना नहीं है।
इसका उद्देश्य केवल एक ऐसी दुनिया की कल्पना करना है जहाँ—
कोई बच्चा गरीबी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
कोई रोगी आर्थिक कठिनाई के कारण उपचार से वंचित न हो।
कोई परिवार बेरोज़गारी के कारण निराश न हो।
कोई किसान सिंचाई के अभाव में अपनी मेहनत खोने को मजबूर न हो।
कोई नागरिक भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित न रहे।
मेरा विश्वास है कि जब नागरिक सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर के साथ जीवन जीते हैं, तभी एक सच्चे अर्थों में “खुशहाल समाज” का निर्माण होता है।
मैं भली-भाँति समझता हूँ कि प्रत्येक राष्ट्र अपनी संवैधानिक व्यवस्था, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, संसाधनों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार नीतियाँ निर्धारित करता है। इसलिए यह पत्र किसी प्रकार की माँग या दबाव नहीं है, बल्कि मानव कल्याण के साझा मूल्यों पर आधारित एक विनम्र नागरिक अपील है।
यदि आपका सम्मानित कार्यालय इस पत्र में व्यक्त विचारों पर कोई प्रतिक्रिया, सुझाव या अनुभव साझा करना उचित समझे, तो मैं उसे अत्यंत सम्मान और कृतज्ञता के साथ स्वीकार करूँगा।
भारत की निरंतर प्रगति, शांति, समृद्धि तथा उसके सभी नागरिकों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
आपके अमूल्य समय और सेवा-भाव के लिए हार्दिक धन्यवाद।
“जब लोग खुश होते हैं, तब दुनिया और बेहतर बनती है।”
सादर,
मित्र लाल पार्दे
परिकल्पनाकार
साथी दर्शन (Sathi Philosophy)
खुशहाल समाज अभियान (Happy Society Campaign)
पिछले 20 वर्षों से पोलैंड में निवासरत एक साधारण नेपाली नागरिक
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